Wednesday, December 30, 2009

                                       
                                उदास  तन्हाई (SAD LONLINESS)

शुक्रिया उन दोस्तों का
   जिन्होंने निभाई ऐसी दोस्ती की
     दुश्मन भी शर्मा जाये

मेहरबानी खून के रिश्तो की
  जिन्होंने दिया ऐसा साथ
   कि खून पानी से भी घबरा जाये

सलाम उन रकीबो को
 जो समय के बदलने से पहले
     ही अपनी नज़र बदल गए

एहसान मंद हो उन रिश्ते दारो का
   जिन्होंने निभाए कुछ इस तरह रिश्ते
    कि रिश्ते दारो के नाम से हम सिहर जाये

जिन्दगी सुना था बहुत हसीन हो तुम
  मगर उतरा जब आवरण तुम्हारा
    तब जाना तुम्हारा असली चेहरा क्या हें

मै तो बस कहता हूँ बेगाने हुए उन अपनों से
  मत आना बाद मेरे मेरी तस्वीर पर हार चढ़ाने
   मेरी हार का कारण भी तुमसे ही हें

मत रोना सामने शव के मेरे
  मुझे सिर्फ नफरत ही नहीं हें
    बल्कि जिन्दगी और दुनिया से उदासीनता हें

ऐसी दोस्ती रिश्तो को नकारता हूँ मै
   जिन्होंने मुझे उदास कर दिया हें
    ऐसी जिन्दगी ऐसी दुनिया को ठुकराता हूँ मै
      जो ऐसे रिश्तो के दम पर चलती हें

तनहा खढ़ा हूँ मै अकेलेपन कि चादर ओढ़े
   न जिन्दगी कि चाहत न मौत का डर हें
   बस सोचता जरूर हूँ इतना
  
काश छा जाता कुछ पहले मौत का अँधेरा
  न देख पाता तब मै जिन्दगी का यह करूप चेहरा
   कुछ सुनहरे पलो की याद मेरे भी साथ होती
    तो शायद मेरे मौत की तन्हाई भी इतनी उदास न होती  ई

              लेखक     परवीन चंदर झांझी      

No comments:

Post a Comment