Monday, January 4, 2010

                          व्यापर या व्यव्हार ( BUSINESS OR RELATIONS)

व्यापार तो बना था व्यवहार के लिए
   मगर अब यह आलम है की हर चीज़ का व्यापार होता है
     व्यवहार को तो भूल गया इन्सान
        अब तो हर बात में उसकी व्यापार होता है

रिश्तो का खूब होता है व्यापार
  मतलब का हर तरफ सजा बाज़ार होता है
    स्वार्थ हो जब तब होता है रिश्ता
       निस्वार्थ रिश्तो से तो हर कोई बेजार होता है

भावनाओ का भी दुनिया में होता है व्यापार
   स्वार्थ वश ही भावनाओ का इज़हार होता है
     दौलत वालो की वेश्या को भी अपना लेती है दुनिया
        नव नवेली दुल्हन सा उससे व्यवहार होता है

जिन्दगी स्वार्थ की दुनिया में है क्या चीज़
   जिन्दगी से तो यहाँ हर रोज़ खिलवाढ़ होता है 
     दौलत की अंधी दुनिया के बाशिंदों मत करो व्यव्हार का व्यापार 
       व्यवहार ही तो जीवन का आधार होता है

याद रखो जब मूंदेगी आंख छुटेगी सांस 
   जानोगे तब की जीवन के इस कुरुशेतर में 
      कही व्यवहार का ही तो तुने नहीं  कर दिया व्यापार 
         क्योंकि उस दुनिया में व्यापार नहीं सिर्फ व्यवहार होता है  II 

                    लेखक     प्रवीन चंदर झांझी

3 comments:

  1. रिश्तो का खूब होता है व्यापार
    मतलब का हर तरफ सजा बाज़ार होता है
    स्वार्थ हो जब तब होता है रिश्ता
    निस्वार्थ रिश्तो से तो हर कोई बेजार होता है
    kya khoob baat kahi!
    Blog jagat me swagat hai!

    ReplyDelete
  2. इस नए वर्ष में नए ब्‍लॉग के साथ आपका हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. आशा है आप यहां नियमित लिखते हुए इस दुनिया में अपनी पहचान बनाने में कामयाब होंगे .. आपके और आपके परिवार के लिए नया वर्ष मंगलमय हो !!

    ReplyDelete
  3. नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ द्वीपांतर परिवार आपका ब्लाग जगत में स्वागत करता है।

    ReplyDelete