Sunday, January 3, 2010

                      कलयुग का महाभारत
  
सिर्फ नहीं हुआ था त्रेता युग में महाभारत
  बल्कि कलयुग में भी एक महाभारत चल रहा है
   तब तो जंग खून के रिश्तो में थी
     अब तो खून ही रंग बदल रहा है

तब हुआ था चीर हरन द्रोपदी का
  अब तो गांधारी  का ही चीर खतरे में पढ़ा है
    तब तो दुशासन ने किया था हरन चीर का
      अब तो अर्जुन भी उसके साथ मिला  है

तब युद्ध का कारण था एक धृतराष्ट्र
  अब तो पूरा देश ही धृतराष्ट्रों से भरा है
    तब लढ़ी थी उन्होंने जंग सिदान्तो की
     आज कौरव पांडव मानते है दोनों की सिदान्तो में क्या धरा है

मिल बांटकर खाते है दोनों
  जानते है की लढने   में क्या धरा है 
   खूब देखा खूब आजमाया सबको
     थक कर भीष्म पितामह (जनता)
        बाणों की शेया पर पढ़ा है

एक तरफ खढ़ा दुर्योधन गदा लिए
   दूसरी तरफ अर्जुन तीर ताने खढ़ा है
     इन दोनों से कौन बचाएगा मुझे
       पितामह(जनता) यह सोच कर डरा है  II

                     लेखक    प्रवीन  चंदर झांझी          

No comments:

Post a Comment