Saturday, January 9, 2010

                       मेरी ह्रदय वेदना (PAIN OF MY LIFE OR SUCIDE NOT)
 हो जाता हूँ मै बहुत  परेशान
   न जान पाता मै वो राज जब
     जानते है मेरे बारे मै जो सब

हो जाता हूँ मै बहुत बेचैन
  जब करता हूँ  महसूस मै कि
   कर रहा है कोई खरीदो फरोख्त मेरी

हो जाता हूँ मै बहुत हैरान
  जब मेरे देखते देखते बदल देते हो
   दृश्य किसी चल चित्र की तरह

आखिर क्यों तुमने
    बांध रखा है मुझे
     पूर्ती के लिए अपने स्वार्थो की

आखिर क्यों हरा देते हो
 मेरी सचाई की हर बात को
  चल के चाल अपनी चलाकी की

आखिर क्यों कर दिया नष्ट
  मेरे आदर्शो के महत्व को
   जो थी आधारशिला मेरे जीवन की

आखिर क्या मिला तुम्हे छीनकर
 मेरे जीवन की जमा पूंजी मेरा विश्वास
   कि मेने जो भी जीवन मै किया वो तुम्हारे अछे के लिए किया

आखिर क्यों दुत्कार दिया मुझे
  नकार के मेरे जीवन की मेहनत को
   जीवन के इस मुश्किल मोढ़ पर ठहराकर गलत मुझे

आखिर क्यों खेलते हो
  श्रदा विश्वास से मेरे करने को
   पूर्ण अपनी वास्नाए घिनोनी सी

आखिर कब तक डालते रहोगे
  बुराईया अपने रिश्तो की
   करके मुझ निर्दोष की रुस्बियो भी

आखिर कब तक तोढ़ते रहोगे
  आतंम विश्वास की डोर  को मेरे
   करने को संतुष्ट भावना अपने अहंकार की

काश मै जान पाता
  रहस्य अपने जीवन का
   जान पाता क्यों चाहते हो तुम ऐसा

क्यों नहीं तुम चाहते
    की  मै भी जीयू  जीवन
       एक साधारण व्यक्ति का

क्यों तुम नहीं मानते
  कि जिया है अब तक जीवन
   मेने अपने आदर्शो  का

क्यों तुम महसूस नहीं करते
  कि जब तक थी हिम्मत मुझमे
   कि हर कोशिश मेने तुम्हारी ख़ुशी के लिए

क्यों तुम्हारा दिल नहीं करता
  कि करो कुछ  तुम भी
   मेरी ख़ुशी के लिए      
  
पर क्या  तुम  बदल पाओगे
 विधि के इस विधान को
क्या तुम झूठला पावोगे
मेरे विश्वास के भगवान को

क्या तुम रोक पाऔगे मेरे
मौत के बाद कि मेरी मुस्कान को
अलविदा कहता हुआ मै तो
हँसता हुआ चला जावूगा

मत याद करना मुझे वर्ना
मै तुम्हे आकर  याद बहुत तढ़प ऊँगा
कयोंकि  तब न  छुपा पाओगे कोई राज मुझसे
और मै अपने जीवन के हर राज को जान जाऊंगा    II

             लेखक प्रवीन चंदर झांझी     
         
          
     
      
   

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